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1- मदार एक औषधीय पादप है। इसको मंदार ', आक , ' अर्क ' और अकौआ भी कहते हैं। इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है। पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं। हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं। इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है। फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं। फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है। आक की शाखाओं में दूध निकलता है। वह दूध विष का काम देता है। आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है। चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है। 2- पहाडियों का मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। शिव को यहां भूतेश्वर के रूप में जाना जाता है क्योंकि इस मंदिर में सभी देवताओं की भी मंदिर है जैसे हनुमान सीता राम और यहाँ पर समय-समय पर पहाड़ों के निचे बसे हुए लोग पूजा-अर्चना के लिए आते रहते है | 3 - शिमला जैसा नजारा है यहाँ पहुचने के लिए पैदल का ही रास्ता है और यहाँ जाने ...
अम्बेडकर की पत्रकारिता जब तक मीडिया में हरेक तबके की यथोचित भागीदारी नहीं होगी , सूचना का एकपक्षीय , आग्रहपूर्ण और असंतुलित प्रसार जारी रहेगा। इस असंतुलित प्रसार के प्रतिरोध में ही आंबेडकर ने दलितों के अपने खुद की मीडिया की जोरदार वकालत की थी। वे मानते थे कि अछूतों के साथ होनेवाले अन्याय के खिलाफ दलित पत्रकारिता ही संघर्ष कर सकती है बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का मानना था कि दलितों को जागरूक बनाने और उन्हें संगठित करने के लिए उनका अपना स्वयं का मीडिया अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने 31 जनवरी 1920 को मराठी पाक्षिक ‘ मूकनायक ’ का प्रकाशन प्रारंभ किया था। ‘ मूकनायक ’ यानी मूक लोगों का नायक। ‘ मूकनायक ’ के प्रवेशांक की संपादकीय में आंबेडकर ने इसके प्रकाशन के औचित्य के बारे में लिखा था , “ बहिष्कृत लोगों पर हो रहे और भविष्य में होने वाले अन्याय के उपाय सोचकर उनकी भावी उन्नति व उनके मार्ग के सच्चे स्वरूप की चर्चा करने के लिए वर्तमान पत्रों में जगह नहीं। अधिसंख्य समाचार पत्र विशिष्ट जातियों के हित साधन करनेवाले हैं। कभी-कभी उनका आलाप इतर जातियों को अहि...
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